अंग अंग चढ़ी नाम दी खुमारी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन गुरुदेव भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

अंग अंग चढ़ी नाम दी खुमारी,

गुरा ने ऐसा रंग सुटेया,

बाहरो अन्दरो मैं रंगी गई सारी,

गुरा ने ऐसा रंग सुटेया,

अंग अंग चढ़ी नाम दी खुमारी,

एह न पूछो रंग पीला सी की लाल सी,

रंग जेह्डा वी सी बड़ा ही कमाल सी,

वेख सोचा विच डूबियाँ ललारी,

गुरा ने ऐसा रंग सुटेया,

अंग अंग चढ़ी नाम दी खुमारी,

गुरु चरना च मथा जदों टेकेया,

दसा की ओह नजारा जो मैं वेखेयाँ,

वेखे अंग संग बांके बिहारी,

गुरा ने ऐसा रंग सुटेया,

अंग अंग चढ़ी नाम दी खुमारी,

खोली गुरा जद सच दी किताब सी,

मेनू दिता हर सवाल दा जवाब सी,

इक पल च मुकाई गल सारी,

गुरा ने ऐसा रंग सुटेया,

अंग अंग चढ़ी नाम दी खुमारी,

गुरा ज्ञान वाला तीर जदों मारिया,

नि मैं गले गले राम उचारेया ,

सारे कहंदे मेनू गुरा दी प्यारी,

गुरा ने ऐसा रंग सुटेया,

अंग अंग चढ़ी नाम दी खुमारी,

गुरांने ऐसा रंग सुटेया-2

वाहरो अन्दरो मैं रंगी गई सारी

गुराने ऐसा रंग सुटेया -2

अंग अंग चढ़ी नाम दी खुमारी,

गुरा ने ऐसा रंग सुटेया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।