श्यामा जी की इस ओढ़नी को

दासानुदास श्रीकान्त दास ।
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

श्यामा जी की इस ओढ़नी को ले जाकर हरि को दे देना ।

श्यामाजी की इस ओढ़नी को,

ले जाकर हरि को दे देना ।

मेरा तो पत्र यही ही है,

लिखना पढ़ना हम क्या जाने ।।

राधा नेत्रांजलि से छलके,

आँसू इसके हर धागे में ।

आसूँ मिश्रित काजल देखो,

इसको हर कोई क्या जाने ।। श्यामा जी...

रासेश्वरि के कर कमलों की,

मेंहदी देखो है लगी हुई ।

केशर उरोज के भी देखो,

पर इसको कोई क्या जाने ।। श्यामा जी...

प्रस्वेद बिन्दु प्यारी जू के,

इस ओढ़नी में हैं घुले हुए ।

मादक सुगंध इसकी प्यारी,

गोपाल बिना कोई क्या जाने ।। श्यामा जी...

सारे जीवन बाँचें इसको,

पर अन्त न पावेंगे नटवर ।

उत्तर इसका आँसू ही है,

देवा तू इसको क्या जाने ।। श्यामा जी...

स्वर : दासानुदास श्रीकान्त दास ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।