गणपति जी का ध्यान धर ले

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

भक्ति रस का तू रस पान कर ले

चार दिन की जिन्दगी है ध्यान धर ले

ध्यान धर ले रे तू ध्यान धर ले

भक्ति रस का तू रस पान कर ले

चार दिन की जिन्दगी है...

देवों में देव हैं गणपति जी प्रथम देवा

इनकी सेवा से पाएगा तू मेवा

प्रथम पूजन इनका ए इंसान कर ले

भक्ति रस का तू रस पान कर ले

चार दिन की जिन्दगी है ध्यान धर ले

ध्यान धर ले रे तू ध्यान धर ले

भक्ति रस का तू रस पान कर ले

चार दिन की जिन्दगी है...

विघ्नहर्ता हैं तेरे सारे विघ्न हरेंगे

मनोकामनाएं सारी तेरी पूरी करेंगें

इनके चरणों में सारा तू जहान कर ले

भक्ति रस का तू रस पान कर ले

चार दिन की जिन्दगी है ध्यान धर ले

ध्यान धर ले रे तू ध्यान धर ले

भक्ति रस का तू रस पान कर ले

चार दिन की जिन्दगी है ....

इनकी भक्ति कभी विफल ना जाए

राह भले दुर्गम हो सरल बनाए

बात सुन राजीव की तू कान धर ले

भक्ति रस का तू रस पान कर ले

चार दिन की जिन्दगी है ध्यान धर ले

ध्यान धर ले रे तू ध्यान धर ले

भक्ति रस का तू रस पान कर ले

चार दिन की जिन्दगी है...

©राजीव त्यागी

नजफगढ़ नई दिल्ली

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।