माफ करी साडा बोलेया चालेया माफ करी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माफ करी साडा बोलेया चालेया माफ करी,

ऐसी दर दर दे दुत्कारे आ बेठे तेरे द्वारे,

माफ करी.....

ऐसी भुल्लण हारे दाती भुल्ला कितिया ने,

की दस्सिये दाती की साढ़े नाल बीतीया ने,

सानू मॉइये चारणी ला के,

साढ़ी दिल चो भुल्ल भुल्ला के,

माफ........

असी पंछी हा तेरे बागा दे कल उड़ जाना,

अस्सा फेर पलट के दाती वापस नई आना,

साढे पंख वी छोटे छोटे ने,

साढ़े कर्म बड़े ही खोटे ने

माफ......

साढ़े नैना दे विच प्यास हैं तेरे दर्शन दी,

सानू अजे वी आस हैं माए तेरे परसन दी,

सानू दे दर्शन इक वारी,

तेरी खिल्ली रहे फुलवारी,

माफ......

चंचल दा माइये तेरे सिवा कोई होर नही

बच्चेया दा माईए तेरे सिवा कोई होर नही

तेरी मर्ज़ी उत्ते चलदा किसे दा जोर नही,

साड़ी पिछ्ली भुल्ल विसारो,

साडा अगला जन्म सवारो,

माफ करि......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।