प्रभु जन्मे कृष्ण मुरारी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

प्रभु जन्में कृष्ण मुरारी, नंदलाल पीतांबर धारी,

नंदलाल पीतांबर धारी, गोपाल कृष्ण मुरारी।

प्रभु जन्में कृष्ण मुरारी........

कारागार में जन्म लिया जब,

टूटी बेडिया अचरज में जब,

कारागार में जन्म लिया जब,

टूटी बेडिया अचरज में जब,

नारायण, नारायण, नारायण स्वयं पधारे हैं,

नंदलाल पीतांबर धारी।

नंदलाल पीतांबर धारी, गोपाल कृष्ण मुरारी।

प्रभु जन्में कृष्ण मुरारी........

बाल प्रभु की छटा निराली,

नाचे देवगण बजा के ताली,

बाल प्रभु की छटा निराली,

नाचे देवगण बजा के ताली,

हर्षित है, हर्षित है, हर्षित है धरती अम्बर,

हर्षित है दुनिया सारी,

नंदलाल पीतांबर धारी, गोपाल कृष्ण मुरारी।

प्रभु जन्में कृष्ण मुरारी........

नर्कों में भी हर्ष है छाया,

धरती ने बदली फिर काया,

नर्कों में भी हर्ष है छाया,

धरती ने बदली फिर काया,

गोपाला गोपाला गोपाला नंद के लाला ने,

रचा है कैसी माया,

नंदलाल पीतांबर धारी, गोपाल कृष्ण मुरारी।

प्रभु जन्में कृष्ण मुरारी........

प्रभु जन्में कृष्ण मुरारी, नंदलाल पीतांबर धारी,

नंदलाल पीतांबर धारी, गोपाल कृष्ण मुरारी।

प्रभु जन्में कृष्ण मुरारी........

(सिंगर - रोनित बिट्टू वर्मा

गीत संगीत - कमलेश बबलू बरमैया 9425845672)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।