प्यार तेरा महारानिए मैं खोना नही चाहुंदा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

प्यार तेरा महारानिए मैं खोना नही चाहूंदा_2

बहुत रो लेया दाती हुन मैं रोना नही चाहुंदा_2

प्यार तेरा महारानिए......

अपने सोहने दर तो दाती दूर करी न मैनु

दर दर ठोकरा खाके दाती लभेया ए मैं तैनु

जय जय मां, जय जय मां_2

अपने सोहने......

दर दर ठोकरां......

जय जय मां, जय जय मां-2

दुःखा वाला भार सिर ते टोणा नही

चाहुदा_2

बहुत रो लेया.....

प्यार तेरा महारानिए....

बहुत रे लेया.....

ना मैं किसे दे जोगा दाती ना मैनु कुज आऊंदा

तेरे वाजो माए मेरिए कोई ना मैनु चाहुंदा

जय जय मां जय जय मां-2

ना मै किसे दे जोगा...

तेरे वाजो माए मेरिए.....

जय जय मां, जय जय मां-2

दुनिया दी इस भीड़ दे अन्दर खोना नही चाहुंदा-2

बहुत रो लेया दाती.....

प्यार तेरा महारानिए......

बहुत रो लेया दाती.....

रेहा ना मैनु एतबार मां कर्मा ते हुन मेरे,

छड्ड दिती जिन्दगानी अपनी दाती आसरे तेरे

जय जय मां जय जय मां-2

रेहा ना मैनु एतबार.....

छडड दिती जिन्दगानी....

जय जय मां जय जय मां-2

तेरी गोदी छडके मैं किते सोना नही चाहुंदा-2

बहुत रो लेया दाती.....

प्यार तेरा महारानिए.....

बहुत रो लेया दाती......

ऐसा कर उपकार मैं हरपल नाम सिमरदा जावां,

साह लैना भुल जावां तां वी तेरा नाम ध्यावा

जय जय मां जय जय मां-2

ऐसा कर उपकार मैं हरपल......

साह लैना भुल जावां ....

जय जय मां जय जय मां-2

भजन तेरे नु छडके मैं कुछ गाऊना नही चाहुंदा-2

बहुत रो लेया दाती.....

प्यार तेरा महारानिए मैं खोना नही चाहुँदा,

बहुत रोलेया दाती हुन मैं रोना नही चाहुंदा,

बहुत रो लेया दाती..............-2

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।