जठै इंद्र लियो अवतार रूप आवड़ को

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जठै इंद्र लियो अवतार रूप आवड़ को

म्हारै मन में चढ़ गयो चाव खुड़द जावण को

मैं तो लाल धजा ले हाथ संघ रै सागै

मैं तो सरपट चालूं आज सभी सूं आगै

मैया करयो हुकुम इणबार, मंदिर आवण को

म्हारो लाड मात इंदेश, सांतरो राखै

म्हांसू दुखड़ा कोसों दूर , आंतरो राखै

है अणतोल्यो आनंद, मैया ने ध्यावण को

कोई मधरा बाजै ढोल, चंग रस घोळे

जय जय करणी इंद्रेश, दिशा दस बोलै

मन करणी भवन में आय, घूमर घालण को

इंद्र करणी दोय नाम , काम सब सागी

आं री मेहर जगत में पाय, कोई बडभागी

मन मौको मत ना चूक, सुजस गावण को

अन्नदाता थांसू आस,भरोसो भारी

थांनै प्रांजल मात मनाय , जिंदगी सारी

थारो गायो रामोतार भजन फागण को

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।