जय भगवान परशुराम की

पारंपरिक
श्री राम भजन विविध भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

जय भगवान परशुराम की

धुनः दिल के अरमां आंसुओं में बह गए

जय जय जय, भगवान परशुराम की।

विष्णु के अवतार, भृगुवर राम की।।

जमदग्नि ऋषि तात, रेणुका मात है,

गौरवता के पुंज, छटा अभिराम की

जय जय जय

पापी दुर्जन दुष्ट चुण चुण मारयो,

ऋषियों मुनियों ने ली, सांस आराम की

जय जय जय

धरती का रथ, वेद के घोड़े लिये,

जीत ली बाजी महासंग्राम की

जय जय जय

धर्म-हित, ऋषि कश्यप को धरा दान कर,

राह 'मधुप' ली राम, लीला धाम की

जय जय जय

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।