तू फिरा अपनी मोरछड़ी

विष्णु कुमार सोनी, कानपुर
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज: जिंदगी की न टूटे लड़ी..

श्याम सर पे मुसीबत पड़ी,

तू फिरा दे, तू फिरा अपनी मोरछड़ी

खाटू वाले उम्मीदे न तोड़ो,

तेरी महिमा सुनी है बड़ी

इन आँखों के पानी का क्या

यह तो दर-दर पे बह जाते है,

दर्द की तो जुबां ही नही,

कैसे अपनी सुना पाते है ।

आंखों से बहते, बन के लड़ी

बाबा, तेरे बिना, दुख हरे कौन मेरा ,

हमने भी अब ये ठाना है श्याम,

खाली न लौट जाएंगे हम

मेरी झोली जो भर जाएगी,

बार-बार भी आएंगे हम

काट दे तू ये दुख की घड़ी ।

तू फिरा दे....

मैं तो दर-दर भटकता फिरू,

श्याम अपनी तरफ मोड़ ले,

प्रीत का कोई नाता मोहन,

दास 'विष्णु' से तू जोड़ ले ,

बांध कर तू, कोई हथकड़ी ।

तू फिरा दे...

लेखक: विष्णु कुमार सोनी, कानपुर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।