दुःख नगरी से प्रीत लगाई

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन विविध भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

दुःख नगरी से प्रीत लगाई,

इसी से हरि सार ना मिले ।

सतसंगति को बिसराई,

इसी से हरि सार ना मिले ।।

भेज दिए हरि करन भजनिया ।

भा गई वासना की रागनिया ।।

तूने दुनिया में पाप कमाई ।

इसी से हरि....

झूठे रिश्तों में मन लागा ।

अब भी सोया तू नहीं जागा ।।

तूने हरि को नर बिसराई ।

इसी से हरि....

देह मनुज का पाकर बन्दे ।

प्रभु बिसार किया पाप के धन्धे ।।

कान्त जग से आसक्ति लगाई ।

इसी से हरि....

भजन रचना : दासानुदास श्रीकान्त दास जी महाराज ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।