श्री बांके बिहारी स्तुति

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

----- श्री बांके बिहारी स्तुति -----

श्याम सलोने बांके बिहारी , महिमा इनकी सबसे न्यारी ।

सर पे इनके मोर मुकुट हैं , हाथो में हैं मुरली प्यारी ।।

मुरली पे जब तान ये छेड़े , भक्त सभी आते हैं दौड़े ।

कुंज गलिन में बैठे बिहारी , दर्शन देते बारी बारी ।।

दर्शन इनके सबसे निराले , बार बार पर्दा ये डाले ।

परदे में छुप छुप के देखो , करते हैं ये खेल निराले ।।

खेल खेल में पूतना मारी , खेल खेल में कुब्जा तारी ।

खेल खेल में कंश को मारा , खेल खेल में सबको तारा ।।

तारण हारे , पालन हारे , हारे हुए के ये हैं सहारे ।

जो भी इनको दिल से पुकारे, उसके बन जाते हैं सहारे ।।

प्रेम भाव से ये हैं रीझते , भक्ति भाव से ये हैं मिलते ।

मीरा जैसा प्रेम करो तो , विष को भी अमृत कर देते ।।

ब्रज की इनको मिट्टी प्यारी , माखन के रसिया ये बिहारी ।

माखन मिश्री भोग लगाओ , प्रेम भाव से इन्हे खिलाओ ।।

हाथ जोड़कर कर लो विनती , मांग लो इनसे सच्ची भक्ति ।

इनकी भक्ति मिल जाये तो , भवसागर से मिलेगी मुक्ति ।।

Bhajan Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।