मेरे दिल नू करार नहियू आंदा

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

मेरे दिल नू करार नहियू आंदा

तू घर मेरे आजा दातया

मोड़ लया मुख मेथो केडी गलो दातया

छेती छेती आजा हुन किथे डेरे लाये नी

ओ इस झल्ली नू गल नहियू लांदा

तू घर मेरे आजा दातया

मेरे दिल नू करार नहियू आंदा

तू घर मेरे आजा दातया

तेरा दर छड़ हुन केडे दर जावा मैं

दिल वाला हाल हुन किसनु सुनावा मैं

हाल दिल वाला तैनू ही सुनाना

तू घर मेरे आजा दातया

मेरे दिल नू करार नहियू आंदा

तू घर मेरे आजा दातया

तक तक राहा हुन थक गई अंखियां

होएगा दीदार कदो आसा एयो रखियां

हाथ जोड़ दी तेनु मैं बुलावा

तू घर मेरे आज दातया

मेरे दिल नू करार नहियू आंदा

तू घर मेरे आजा दातया

आसा ते मुरादा लेके जोत मैं जगाई ए

मै ता हर पल तेरी करजा‌ई वे

सोणे फूला वाले हार पिरोवा

तू घर मेरे आजा दातया

मेरे दिल नू करार नहियू आंदा

तू घर मेरे आजा दातया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।