असी दर दे भिखारी हां, माए नी हथ जोड़ खड़े

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

असी दर दे भिखारी हां,माए नी हथ जोड़ खड़े

सानु मिल जाए चरणा च थां, माए नी हथ जोड़ खड़े

असी दर दे भिखारी...

तेरे मन्दिरा दे विच विच मां, सुहानी तेरी ज्योत जगे-2

तेरी शेर दी सवारी मेरी मां, भवानी सानु प्यारी लगे-2

लै के चरणा ते फुल कलियां, माएनी हथ जोड़ खड़े

असी दर दे भिखारी...

सानु मिल जाए ....

साडे नैना दे विच विच मां, तू दस कानू हंजू भरे-2

तेनु मिलने दा दिल विच चा, तू रहनी ऐ परे परे-2

सानु फड़के विठा लै मेरी मां, माएनी हथ जोड़ खड़े-2

असी दर दे भिखारी...

सानु मिल जाए ....

ओनु गल नल लानी ऐ मां, के जिनु अपनाए कोई ना-2

ओनु पास बुलां नी ए मां , के जिस नु बुलाए कोई ना

सानु दर दर मिलदी ऐ ना, माए नी हथ जोड़ खड़े

असी दर दे भिखारी...

सानु मिल जाए ....

सानु दरश दिखा दे नी मां, के दस तेरा की जाएगा-2

साडे दिल दे दुःख तकके, तेनु वी कदे प्यार आएगा-2

साडी कष्ट| दे विच रहे जां, माए नी हथ जोड़ खड़े-2

असी दर दे भिखारी...

सानु मिल जाए ....

असी मंगते हांऔकात की मां, न अड़िया च अड़

अड़िए-2

पुत होन कपूत जे मां , ते चित मैला न करिए-2

जग बदले न मुंह फेरी मां, माएनी हथ जोड़ खड़े

असी दर दे भिखारी हां.......

सानु मिल जाए चरणा च थां, माएनी हथ जोड़ खड़े

माएनी हथ जोड़ खड़े-2

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।