इसी ओर से मेरी गोद से

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

माँ देवकी की वेदना :

इसी ओर से, मेरी गोद से

इसी ओर से, मेरी गोद से,

कहीं ले गये थे है हाल क्या ?

मेरे लाल का-मेरे लाल का ।।

अब रैन है वह सो रहा,

हाँ सो रहा-हाँ सो रहा ।

करो शोर ना, नहीं बोलना,

कहीं कुछ पता नहीं हाल क्या ?

मेरे लाल का-मेरे लाल का ।।

अब है सुबह वह जग रहा,

कहीं हँस रहा, कहीं रो रहा ।

कुछ देखता, कुछ बोलता,

नहीं जानती हूँ है हाल क्या ?

मेरे लाल का-मेरे लाल का ।।

कहीं झूलता, कहीं खेलता,

कहीं बैठता, कहीं दौड़ता ।

किस है डगर, किस है नगर,

कुछ तो बता दो है हाल क्या ?

मेरे लाल का-मेरे लाल का ।।

श्रीकान्त तुम नहीं जानते,

नहीं जानते-नहीं जानते ।

माँ देवकी, हुई बावरी,

फिर भी पता नहीं हाल क्या ?

मेरे लाल का-मेरे लाल का ।।

श्री श्रीकान्त दास जी महाराज ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।