ब्रज गोपियों से ना निंदिया चुराना

आलोक जी ।
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

गोपी विरह गीत :

व्रज गोपियों से ना निंदिया चुराना ।

ब्रज गोपियों से ना निंदिया चुराना ।

ब्रज गोपियों का है प्रेम पुराना ।।

आज से सूनीं गलियाँ राहें ।

पनघट पे भरना है आहें ।।

छोड़के हमको ना तुम जाना ।।

ब्रज गोपियों से........

मैया बाबा को ना छोड़ो ।

प्रेम के रिश्तों को ना तोड़ो ।।

याद करो वो माखन चुराना ।।

ब्रज गोपियों.......

कुंज-निकुंज का मिलना सपना ।

कैसे कहें कान्हा था अपना ।।

कान्त विरह में है आँसू बहाना ।।

ब्रज गोपियों से.......

भजन रचना : दासानुदास श्रीकान्त दास जी महाराज ।

स्वर : आलोक जी ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।