करीब से जिसने ज्ञान सीखा

आलोक जी ।
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॥ पावन पाठ ॥

करीब से जिसने ज्ञान सीखा,

वो पूरे जीवन में काम आया ।

जो दूर रह करके सीखता है,

वो पूरे जीवन न सीख पाया ।।

करीब से.........

गुरु के चरणों में सिर झुका के,

रहो तो सब ज्ञान मिल सकेगा ।

जो ज्ञान का करता ना अहम है,

वही सही ज्ञान को है पाया ।।

करीब से........

जरा ये सोचो-विचारो बन्धू ,

कदम तुम्हारे चले थे कब से ?

बड़ों ने पकड़ी थी तेरी अँगुली,

तभी से चलना तू सीख पाया ।।

करीब से.......

करीब जाकर स्वयं को समझो,

तुम्हारे अन्दर ही ईश बैठा ।

उसी को अपना ही कान्त समझो,

जो पूरे सृष्टि को है बनाया ।।

करीब से.......

भजन रचना : दासानुदास श्रीकान्त दास जी महाराज ।

स्वर : आलोक जी ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।