गुरुदेव हे हमारे विपदा मेरी मिटा जा

दासानुदास श्रीकान्त दास जी महाराज
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॥ पावन पाठ ॥

सुनो दुःख हमारी,

गुरु दीनवत्सल,

भटकाता फिराता,

मेरा मन ये चंचल ।

षट् बैरी पीछे,

पड़े मेरे गुरुवर,

मिटा दो व्यथा को,

मचाया जो हलचल ।।

गुरुदेव हे हमारे,

विपदा मेरी मिटा जा ।

बनके तमारी आजा,

तम अंध को मिटा जा ।

मझधार में है नैया,

तुम पार भव करा जा ।।

गुरुदेव...

विषयों ने जब सताया,

माया ने भी नचाया ।

तब पद कमल में आया,

अपना मुझे बनाजा ।।

गुरुदेव...

दुनिया को मैंने देखा,

पाया है सिर्फ धोखा ।

खुले ज्ञान का झरोखा,

ऐसा दिया जलाजा ॥

गुरुदेव ...

कर दो कृपा तनिक ही,

बनूँ भक्ति का रसिक ही ।

सत्मार्ग का पथिक ही,

हरि से लगन लगाजा ॥

गुरुदेव...

छाया हो कर कमल की,

मन-बुद्धि हो अमल की ।

सोचे न कान्त छल की,

फिर श्याम से मिलाजा ॥

गुरुदेव...

रचना : दासानुदास श्रीकान्त दास जी महाराज

स्वर : विप्र अमित सारस्वत जी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।