वैकुंठ में बैठे हैं प्रभु जी कृपा ये अपनी बरसा रहे हैं

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन विष्णु भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

तरज - रचा है सृष्टि को जिस प्रभु ने

वैकुंठ में बैठे हैं प्रभु जी

कृपा ये अपनी बरसा रहे हैं

जो भी इनके दर पे हैं आए

बिगड़ी हुई को प्रभु पल में बनाए

सभी को प्रभु जी निभा रहे हैं

कृपा ये अपनी बरसा रहे हैं

गजेंद्र के जैसे बोलो नारायण

आएंगे प्रभु जी हरि नारायण

भक्तों को प्रभु जी बचा रहे हैं

कृपा ये अपनी बरसा रहे हैं

लकी की प्रभु जी ठाकुर है न्यारे

भक्तों को प्रभु जी लगते हैं प्यारे

वही तो मुझसे लिखवा रहे हैं

कृपा ये अपनी बरसा रहे हैं

Lyrics - lucky Shukla

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।