आरती भाये सुमिरन छाये अंतस गाये हो

अमन बघेल
माता दुर्गा आरती दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आरती भाये सुमिरन छाये,अंतस गाये हो,

सोहे वो दियना दाई जगमग जगमग वो,

मनहर साये ओ मोर दाई....

आखि आखि म दाई,दरसन वो तोर महामाई,

सुघ्घर दरस देखाये वो..

जेन देखे देखत रहिगे,अईसन के वो मोहत रहिगे,

टाक पार नज़र फिराये वो..

सब जग जस तोर गाये वो दाई।

सोहे वो दियना दाई जगमग जगमग वो...

मनहर साये ओ मोर दाई"

सोने बरन जब जोति बरय तोर,

चमके भुवन उजियारे वो..

आवत जावत लोगन थिरके,

देखे दरस सुध हारे वो..

नत नत माथ नवाये वो दाई।

सोहे वो दियना दाई जगमग जगमग वो...

मनहर साये ओ मोर दाई"

आरती लेवत लइका वो सोहे,

बालक मुख निक लागे वो..

छल छल छलके वो तोर ममता,

अइसन सुख निक लागे वी..

जाहिर चरन मनाये वो दाई।

सोहे वो दियना दाई जगमग जगमग वो...

मनहर साये ओ मोर दाई"

गायक:अमन बघेल

संगीत:अमर सेन्द्रे,शेखर बघेल

श्री गणराज सत्संग भजन सेवा भजन मंडली

निगम कलोनी आमापारा रायपुर छत्तीसगढ़

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।