न भटको मोह से प्यारे

गायत्री ।
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

न भटको मोह से प्यारे,

ये रिश्ते टूट जाएँगे ।

जिन्हे अपने समझते हो,

कभी वे रूठ जाएँगे ।।

जगत के रिश्ते-नाते सब,

ये छूटेंगे मरोगे जब ।

जिसे दौलत समझते हो,

कभी सब लूट जाएँगे ।।

न भटको.....

सभी विपदा से रोते हैं,

नहीं कोई सुखी जग में ।

अगर प्रभु को सुमिर ले तो,

तेरे गम छूट जाएँगे।।

न भटको.....

सफल नर जन्म करना हो,

तो प्रभु की भक्ति कर लेना ।

कान्त यदि ध्यान यह धरले,

मोह सब छूट जाएँगे ।।

न भटको.....

Lyricist :- दासानुदास श्रीकान्त दास जी महाराज ।

स्वर : गायत्री ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।