ज्योता दी ऐ लो दातिए ज्योता दी ऐ लो

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ज्योता दी ए लौ दातिए,

ज्योता दी ए लौ।।

तेरे नाम दा नूर चढ़ाउंदी।।

वंडदी ए खुशबु,

ज्योता दी ए लौ.....

तू जग जननी, तू कल्याणी,

बुझे ना तेरी ज्योत नूरानी।।

भावे होवे सौंन महीना।।

भावे होवे पौह,

ज्योता दी ए लौ.....

तेरे दर माँ मौर बोलदे,

कन्ना दे विच रस घोलदे।।

तू बच्चया नू देवे लौरियाँ।।

दर ते आवे जो,

ज्योता दी ए लौ.....

जिहड़ा बनके सवाली आवे,

मुहो मंगियां मुरादा पावे।।

ओहदी झोली रवे ना खाली।।

तेरा होवे जो,

ज्योता दी ए लौ.....

पंछी जो आज़ाद परिंदे,

तेरे प्यारे सुनेहे देंदे।।

चंचल कदे भी भूल नहीं सकदा।

बचड़ा कदे वी भुल न ही सकदा

तेरी ममता मोह,

ज्योता दी ए लौ.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।