होली खेलैं हनुमाना अवध में

ज्योति नारायण पाठक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

होली खेलैं हनुमाना अवध में ,

होली खेलैं हनुमाना....

जाके ह्रदय सियाराम बिराजैं,

भक्ती का रस बरसाना अवध में ,

होली खेलैं हनुमाना.....

होली खेलैं हिलमिल चारो भाई,

करि दरस , कपि हरषाना अवध में,

होली खेलैं हनुमाना.....

सब रंग गुलाल अबीर मलत हैं,

खुद सिंदूर खूब लगाना अवध में,

होली खेलैं हनुमाना...

प्रभु दरसन को देवन तरसैं,

चाहें, चरण कमल रज पाना अवध में,

होली खेलैं हनुमाना ....

होली खेलैं हनुमाना अवध में,

होली खेलैं हनुमाना.....

रचना : ज्योति नारायण पाठक

वाराणसी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।