सेवा में छुपे हैं सुख सारे

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॥ पावन पाठ ॥

सेवा में छुपे हैं सुख सारे,इस बात पे हम विश्वास करें।

सेवा में गुजर जाये जीवन सब मिलकर ये अरदास करें।।

तन का आलस मन की हुज्जत, अभिमान की बू सेवा से मिटे।

खुशहाली छाये जीवन में, दुःख दर्द मिटे, हर रोग कटे।

जो गुरु की सेवा करते हैं, प्रभु उनके कारज आप करे।।

सेवा में छुपे हैं सुख सारे,इस बात पे हम विश्वास करें।

दो चार घड़ी की सेवा की , फिर सेवा का अभिमान किया

कुछ को जी भरकर सत्कारा , और बाकी का अपमान किया

ऐसी सेवा सुखदायी नहीं, इस बात का हम अहसास करें।।

सेवा में छुपे हैं सुख सारे,इस बात पे हम विश्वास करें।

जो सतगुरु के मन को भाये ,वो सबसे अच्छी सेवा है।

गर नित्य नियम जो निभ जाये , बस ये ही तन की सेवा है

सेवा की ज्योत जगा करके , दुनिया भर में प्रकाश करें

सेवा में छुपे हैं सुख सारे,इस बात पे हम विश्वास करें।

सतगुरु की सेवा दिलोजान से , ए दासा करते जाए हम,

जो जो भी मिले हुकुम हमको, उसे पूरा करते जाएं हम

फिर लोक सुखी, परलोक सुखी ,जीवन में आनन्द पायें हम

सेवा में छुपे हैं सुख सारे,इस बात पे हम विश्वास करें।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।