मन में हैं पारसनाथ वचनों में पारसनाथ

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

मन में हैं पारसनाथ, वचनों में पारसनाथ,

जीवन में हैं अब तो पारसनाथ..

मंदिर में पारसनाथ, शास्त्रों में पारसनाथ,

पूजा के छंद में हैं पारसनाथ..

पारस का जो ध्यान लगाएं, पारस बन जाएं,

पारस प्रभु का सुमिरन करने, पारस प्रभु का अर्चन करने,

मन प्रभु से मिलन करने चला, मन प्रभु दर्शन करने चला..

पारस ने अपने दर पर, सबको ही आने का मौका दिया,

कृर कमठ की कृरता को, अपनेही समता से पिघला दिया..

सांवलिया पारसनाथ, कलकुण्ड पारसनाथ,

कठनेर वाले बाबा, पारसनाथ..

पारस का जो ध्यान लगाएं, पारस बन जाएं,

पारस प्रभु का सुमिरन करने, पारस प्रभु का अर्चन करने,

मन प्रभु से मिलन करने चला, मन प्रभु दर्शन करने चला..

देखा यहांपर कुछ पल ठहर, दुःख और अशांति की बौछार हैं,

आशा पूरी होती नहीं, आशा ही दुःख का महाद्वार हैं..

आएं थे खाली हाथ, जाएंगे खाली हाथ,

भर दो अपने गुणों से पारसनाथ..

पारस का जो ध्यान लगाएं, पारस बन जाएं,

पारस प्रभु का सुमिरन करने, पारस प्रभु का अर्चन करने,

मन प्रभु से मिलन करने चला, मन प्रभु दर्शन करने चला..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।