करता हूँ एक विनती

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

करता हूँ एक विनती ,

तुमसे ओ मेरे श्याम |

दरबार ये ना छूटे ,

संकट हो या आराम ||

जब क्रोध में आऊँ तो ,

तुम शीतलता देना |

जब हो जाऊँ मैं कठोर ,

थोड़ी कोमलता देना |

न आए अहम कभी ,

प्रभु रखना थोड़ा ध्यान |

सेवा ये ना छूटे ,

चाहे दुख हो या आराम ||

जब पड़ जाऊँ कमजोर,

प्रभु हाथ पकड़ लेना |

अंधियारा हो घनघोर,

बाँहों में जकड़ लेना |

ना चाहूँ अधिक लेकिन,

दे पाऊँ दिन को दान |

विश्वास ये ना टूटे,

संकट हो या आराम ||

व्याकुल हो जाऊँ तो,

तुम धीर बँधा देना |

सत्पथ से भटक जाऊँ तो,

तुम राह दिखा देना ||

मन में ना आए बैर,

हाथों से अच्छे का |

रिश्ता ये ना टूटे,

संकट हो या आराम ||

जब अंतकाल आए,

थोड़ी दया दिखा देना |

‘गोविंद’ कहे मोहन-सी,

एक झलक दिखा देना |

क्षण भर भी दर्शन पाकर,

हो जाएगा कल्याण |

दरबार ये ना छूटे,

संकट हो या आराम ||

करता हूँ एक विनती ,

तुमसे ओ मेरे श्याम |

दरबार ये ना छूटे ,

संकट हो या आराम ||

लिरिक्‍स् : गोविंद दमानी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।