कन्हैया ना छोड़ो मझधार ,सांवरिया ना छोड़ो मझधार

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कन्हैया ना छोड़ो मझधार ,

साँवरिया ना छोड़ो मझधार ,

पार लगा दो नय्या मेरी ,

पार लगा दो नय्या मेरी ,

ओ मेरे सरकार ,

कन्हैया ना छोड़ो मझधार ,

साँवरिया ना छोड़ो मझधार ,

नौका मेरी बहुत पुरानी ,

बह रहा हैं गहरा पानी ,

नौका मेरी बहुत पुरानी ,

बह रहा हैं गहरा पानी ,

अब तो आओ मेरे कन्हैया ,

अब तो आओ मेरे साँवरिया ,

थाम लो पतवार ,

कन्हैया ना छोड़ो मझधार ,

साँवरिया ना छोड़ो मझधार ,

मैं हूँ तेरा दास कन्हैया ,

तुम हो मेरे सेठ साँवरिया ,

मैं हूँ तेरा दास कन्हैया ,

तुम हो मेरे सेठ साँवरिया ,

मेरे दाता मेरे स्वामी ,

मेरे दाता मेरे स्वामी ,

कर दो बेड़ा पार ,

कन्हैया ना छोड़ो मझधार ,

साँवरिया ना छोड़ो मझधार ,

तेरे बिना कोई नहीं हैं मेरा ,

तू ही मेरा सेठ साँवरिया ,

तेरे बिना कोई नहीं हैं मेरा ,

तू ही मेरा सेठ साँवरिया,

मेरी मय्या मेरे बाबा ,

मेरी मय्या मेरे बाबा ,

तुम ही हो सरकार ,

कन्हैया ना छोड़ो मझधार ,

साँवरिया ना छोड़ो मझधार ,

Bhajan Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।