अब तो कुछ चेत मेरे भाई

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॥ पावन पाठ ॥

अब तो कुछ चेत मेरे भाई ।

अब तो कुछ चेत मेरे भाई ।

खेल कूद में बचपन बीता, व्यर्थ में समय गँवाई ।। अब तो कुछ....

निद्रा भोजन भोग व भय में, हर योनी को बिताई ।

लख चौरासी योनि भटककर, फिर मानव तन पाई ।। अब तो कुछ....

दुर्लभ नर तन पाकर वन्दे, क्यों है पाप कमाई ।

काम वासना की आँधी में, ज्ञान की ज्योति बुझाई ।। अब तो कुछ....

नव यौवन को भोग में खोया, वृद्धावस्था आई ।

कान्त इन्द्रियाँ शिथिल पड़ गयीं, फिर भी समझ न आई ।। अब तो कुछ....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।