भजो रे बूढ़ी खेरमाई

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन विविध भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माई धूमावती के दर्शन कर लो

भजो रे बूढ़ी खेरमाई माँ

अरे बाना निकरें निकरें जवारे

नाचें जोगिनियां साथ माँ

अरे नारियल फूल जासोन की माला

माई के मन को भाए माँ

अरे मनसा पूरण करता हैं माता

खूब भरे भंडार माँ

अरे खप्पर में हरे हरे जवारे

जब निकरें एक साथ माँ

अरे धूनी को झूला निकरें न्यारे

शोभा वरनी न जाए माँ

अरे बाना छिदावे मोरी माई के लंगुरवा

माई के दुलारे बूढ़ी माई के लंगुरवा

छेड़ रहो पंडा छिदवा रहे लंगुरवा

ए बाना छिदावे मोरी माई के लंगुरवा

अरे बड़े बड़े बना भगत ले आवें

छोटे छोटे बना भगत ले आवें

माई के द्वारे चढ़ाएं माँ

अरे जय बूढ़ी माई की बोल बोल के

भक्तों ने बाना छिदवाए माँ

अरे आगे हनुमान जी की बेड़ा चलता है

पीछे पीछे भैरों लाल माँ

अरे बीच में चले मोरी बूढ़ी खेरमाई

ए सातों बहनिया साथ माँ

अरे जब पंडा ने निबुआ निचोड़ो

देवी मारें किलकार माँ

अरे मचल मचल देवी कला दिखावें

ए पंडा से संभारी न जाए माँ

अरे हाथ जोड़ तोरे भगत खड़े हैं

द्वारे पे करत गुहार माँ

अरे अपनी शरण में रखियो माता

मत्रु भी खड़ो है तोरे द्वार माँ

Singer - Shubhash Soni

Uploaded by Sunil Raikwar

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।