मेरा हारा वाला पीर दा पीर

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

मेरा सतगुरु पीरा दा पीर मेरा मन रंगया गया

रंगया गया मन रंगया गया

नाले बादशाह नाले फ़क़ीर

मेरा मन रंगया गया

सुध भूध भूल गई मैं सब तन दी

चिंता छुट्टी जन्म मरण दी

मेरी छुट गयी मन दी पीड़

मेरा मन रंगया गया

मेरा सतगुरु पीरा दा पीर मेरा मन रंगया गया

रंगया गया मन रंगया गया

नाले बादशाह नाले फ़क़ीर

मेरा मन रंगया गया

पाठ नाम वाला एसा पढया

जिसदा नशा सदा ल‌ई चडया

मैं हो गई बड़ी अमीर

मेरा मन रंगया गया

मेरा सतगुरु पीरा दा पीर मेरा मन रंगया गया

रंगया गया मन रंगया गया

नाले बादशाह नाले फ़क़ीर

मेरा मन रंगया गया

सतगुरु दिती ऐसा मस्ती

भूल गई मैं सब दी हस्ती

हॉवे चरना विच अखीर

मेरा मन रंगया गया

मेरा सतगुरु पीरा दा पीर मेरा मन रंगया गया

रंगया गया मन रंगया गया

नाले बादशाह नाले फ़क़ीर

मेरा मन रंगया गया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।