शुभ वेला है बैसाखी की घड़ी आ गई

पारंपरिक
अन्य गुरु वाणी विविध भजन guru-vani
॥ पावन पाठ ॥

शुभ वेला है बैसाखी की शुभ घड़ी आ गई

सतगुरु प्यारे लिया अवतार मस्त बहार छा गई

देख के सारे ये सुंदर नज़ारे खुशियों में दिल झूमे

आज सतगुरु ने किरपा लुटाई

बड़े भागो से खुशियाँ ये पाई

अर्शो से चलके शाही सरकार आ गई

सतगुरु प्यारे लिया अवतार मस्त बहार छा गई

शुभ वेला है बैसाखी की शुभ घड़ी आ गई

सतगुरु प्यारे लिया अवतार मस्त बहार छा गई

जब से मिला ये तेरा द्वारा मैं भूल गया जग सारा

तेरे द्वारे की शोभा निराली है

यहाँ हर दिन दशहरा दिवाली है

भगतों को अज खुशियों की सौगात मिल गई

सतगुरु प्यारे लिया अवतार मस्त बहार छा गई

शुभ वेला है बैसाखी की शुभ घड़ी आ गई

सतगुरु प्यारे लिया अवतार मस्त बहार छा गई

अपना बनाया जो दर पे बुलाया हम दासों पे कर्म कमाया

प्रभु चरणों में हमको बुलाते रहो

यू ही भक्ति की दात लुटाते रहो

दासों पे ये रहमत की बरसात हो गई

सतगुरु प्यारे लिया अवतार मस्त बहार छा गई

शुभ वेला है बैसाखी की शुभ घड़ी आ गई

सतगुरु प्यारे लिया अवतार मस्त बहार छा गई

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।