सकती माई मुंगेली के

पारंपरिक
हनुमान जी भजन दुर्गा भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

सकती माई मुंगेली के ,उतंगम पीपर जरवामा,

अंजनी के लाला सबके दुलारा, बइठे मंदिर चवरामा,

बड़ा ग़रीबीन बुढ़िया ल दाई,सपना देके आये वो

पेंडारा कापत बंजर भुईया,ल तै स्वर्ग बनाये वो

चंदा सुरुज कस हवय उजाला,

दाई तोरे नयना मा....

तोर अंगना म तुलशी के बिरवा,संग म भैरव बाबा वो

उकती मुह के मंदिर बनेहे,तीर म बघवा के माडा वो

अठवाही म भोले बाबा,

चढ़हे हवय बइला मा....

सकती रूप म प्रगट भय म,दुख पीरा बिसराये वो

जय माँ चण्डी सेवा मंडली के,करबे तै सहाये वो

प्रेम आनंद तोर मया म तरगे,

राम कुमार पुजारी ल तारे,

ममता भरे कोरा मा....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।