ओ सांवरे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

अपनों ने मारा, गैरों से क्या कहें,

तेरे सिवा बाबा, मेरी कौन सुने,

ओ सांवरे, ओ सांवरे, ओ सांवरे, ओ सांवरे...

सुनोगे बाबा तो सुनाएंगे, अपना हाल ए दिल तुम्हें,

ओ सांवरे, ओ सांवरे, ओ सांवरे, ओ सांवरे...

बात मेरे दिल की, तुमसे क्या छिपे बाबा,

तुम जानते सब कुछ हो, हालात मेरे बाबा,

हालत पे मेरी, जब यें लोगो ने, खेले ऐसे दाँव रे,

ओ सांवरे, ओ सांवरे, ओ सांवरे, ओ सांवरे...

ये एक हीं दर हैं वो, जहाँ सबकी सुनाई हों,

तेरे साथ हैं बाबा श्याम, फिर क्यों तन्हाई हों,

यें जीवन तेरा भी सवारेगा, छोड़ेगा ना साथ रे,

ओ सांवरे, ओ सांवरे, ओ सांवरे, ओ सांवरे...

जब साथ ना दे कोई, मेरा श्याम आसरा हैं,

सब कहते हैं इसको, हारे का सहारा हैं,

नैया तेरी भी बचायेगा, थामे जब यें हाथ रे,

ओ सांवरे, ओ सांवरे, ओ सांवरे, ओ सांवरे...

यें हस्ती रहें दुनियाँ, कोई परवाह नहीं,

तेरा साथ मिले मुझकों, चाहूँ मैं इतना हीं,

बाबा चरणों में तेरे अपना, यें मोहित सब कुछ वार दे,

ओ सांवरे, ओ सांवरे, ओ सांवरे, ओ सांवरे...

लेखक व गायक :- मोहित गोयल

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।