फुल्लां दी वरखा लाई

पारंपरिक
अन्य भजन बाबा बालक नाथ भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

लाई लाई लाई लाई लाई लाई बाबे ने फुल्लां दी वरखा लाई,

फुल्लां दी वरखा लाई बाबे ने फुल्लां दी वरखा लाई बाबे ने,

इस मिटटी दा क्या कुछ बनदा,

मिट्टीया दा मंदिर बनाया बाबे ने,

मंदिर च धुना लाया बाबे ने ,

लाई लाई........

इस लकड़ दा क्या कुछ बनदा

पैरा च खडावा बनायीं बाबे दे,

पैरा च खडावा पाई बाबे दे,

लाई लाई............

इस पितलू दा क्या कुछ बनदा,

इस दा कमंडल बनया बाबे ने,

कमंडल च लस्सी पाई बाबे ने,

लाई लाई............

इस चांदी दा क्या कुछ बनदा,

गले नु सिंगी बनाई बाबे ने,

गल विच सिंगी पाई बाबे ने,

लाई लाई............

इस लोहे दा क्या कुछ बनदा,

लोहे दा चिमटा बनया बाबे ने,

धुनें विच चिमटा पाया बाबे ने,

लाई लाई............

इस कपडे दा क्या कुछ बनदा,

कपडे दी झोली बनाई बाबे ने,

गल विच झोली पाई बाबे ने,

लाई लाई............

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।