सुहा चोला ते दुपट्टा नाभी रंग दा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सुहा चोला ते दुपट्टा नाभी रंग दा-2

के सिर तेरे छत्तर सोहे -जय हो

के सिर तेरे सोहे अम्बे रानिए

सुहा चोला ते दुपट्टा नाभी रंग दा-2

मईया किने तेरा भवन बनाया-2

के कौन तेर चंबर झूले - जय हो-

के कौन तेर चंबर झोले अम्बेरानिए

सुहा चोला....

पंजा पांडवा ने भवन बनाया-2

के अर्जुन चंबर झूले - जय हो

के अर्जुन चंबर झोले अम्बे रानिए

सुहा चोला ते दुपट्टा नाभी रंग दा-2

के सिर तेरे....

मईया ऊंचा है द्वारा तेरा-2

के दिसदा है आनन्दपुर तो- जय हो

के दिसदा है आनन्दपुर तो अम्बेरानिए

सुहा चोला....

के सिर तेरे....

मईया चढ़के चढ़ाईया आवां-2

ओ बगे बगे शेरावालिए-जय हो

ओ बगे बगे शेरावालिए अम्बे रानिए

सुहा चोला....

के सिर तेरे....

मईया चढ़के चढ़ाईया आवां-2

ओ सुहे सुहे चोलेयां वालिए- जय हो

ओ सुहे सुहे चोलेया बालिए अम्बेरनिए

सुहा चोला....

के सिर तेरे....

ओ मईया छडके द्वारे सारे-2

के इको तेरा दर मलेया - जय हो

के इको तेरा दर मलेया अम्बे रानिए

सुहा चोला तो दुपट्टा नाभी रंग दा

के सिर तेरे छत्तर सोहे अम्बे रानिए

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।