तू ही मेरी मैं भी तेरी मेरी प्यारी राधे

सुश्री अखिलेश्वरी देवी
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तू ही मेरी मैं भी तेरी मेरी प्यारी राधे ।

बने नहिं मेरी तेरी कृपा बिनु राधे ।

मोरी ओर करु टुक कृपाकोर राधे ।

तोरी कृपाकोर को न ओर छोर राधे।

कृपा ते ही बना तोरा तन मन राधे ।

तू तो है ' कृपालु ' सब दिन ही ते राधे।

पुस्तक : युगल माधुरी

कीर्तन संख्या- 34

पृष्ठ संख्या- 123

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।