जय हो जय हो सद्गुरु सरकार, बलिहार बलिहार

सुश्री अखिलेश्वरी देवी
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जय हो जय हो सद्गुरु सरकार, बलिहार बलिहार।

तोपै कोटि प्राण दउँ वार, बलिहार बलिहार।

तू तो दूजो नंदकुमार, बलिहार बलिहार।

तू तो विधि हरि हर अवतार, बलिहार बलिहार।

तू तो सगुण ब्रह्म साकार, बलिहार बलिहार।

तू तो दिव्य ज्ञान दातार, बलिहार बलिहार।

तू तो दिव्य प्रेम दातार, बलिहार बलिहार।

तू तो पतितन की पतवार, बलिहार बलिहार।

तू तो सबको साँचो यार, बलिहार बलिहार।

तू तो अधम उधारन हार, बलिहार बलिहार।

तू तो करुणा को भंडार, बलिहार बलिहार।

तू तो कृपा रूप साकार, बलिहार बलिहार।

तू तो रसिकन को सरदार, बलिहार बलिहार।

तू तो नित कर पर उपकार, बलिहार बलिहार।

तू तो बिगरी बनावन हार, बलिहार बलिहार।

तेरे पाछे डोले नंदकुमार, बलिहार बलिहार।

तोपे जाउँ बलि बारंबार, बलिहार बलिहार।

तेरी कृपा पै 'कृपालु' बलिहार, बलिहार बलिहार।

पुस्तक : ब्रज रस माधुरी, भाग-3

पृष्ठ संख्या -2

कीर्तन संख्या -2

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।