बच्चेया दी आसा माए कितिया न पूरिया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

बच्चेया दी आसा माए कितिया न पूरिया,

हुन दस माए नी मेरिए कादी मजबूरिया-2

बिन मंगेया ही मां पण्डार भर दिते ने-2

रज रज मेहरा दे द्वार खोल दिते ने-2

मन दिया कुछने आसा मां अधूरिया

हुनदस माएनी मेरिए कादी .....

बचेया दी आसा....

हुन दस माएनी....

चढ़के चढ़ाईयां मईया दर तेरे आने आ-2

गज बज नचनच जैकारे भी लगाने आ-2

पहुंचिया कन्ना तक बाजा माए मेरिया-2

हुन दस माएं नी.....

बचेया दी आसा......

हुन दस माए नी मेरिए....

तेरे ते भरोसा मईया, तेरे नाल प्यार है-2

इको ही आस मेरी, करना दीरार है-2

इकबार आजा माए आसा होन पूरिया-2

हुन दस माएं नी.....

बचेया दी आसा......

हुन दस माए नी मेरिए....

जिन्दड़ी मैं सारी हुन तेरे लेखे लाई ए-2

देखना ए केड़े बेले हुंदी सुनवाई ए-2

दर्शना दी आस मईया होन आसा पूरिया-2

हुन दस माएं नी.....

बचेया दी आसा......

हुन दस माए नी मेरिए....

अपने भी दाती हुन हो गए पराए ने- 2

की दसा मईया तेनु अमड़ी दे जाए ने-2

रोरो दाती मैं तां अरजा गुजारिया-2

हुनदस माए नी मेरिए............

बचेया दी आसा माए...........

हुनदस माए नी मेरिए कादी मजबूरिया-3

Lyricisit (Bitu Banty)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।