अंखियां तों चुक्क पर्दा जे देखना दाती दा जलवा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ओ हलवा हलवा हलवा

अंखियां तों चुक्क पर्दा

जे देखना दाती दा जलवा

ओ छोले छोले छोले

ओदे नाल की बोलना

जेड़ा जय माता दी ना बोले

ओ तारां तारां तारां

दाती तेरे चरणां तों

मैं तां लख स्वरगां नूँ वारां

ओ थाली थाली थाली

उचेयाँ पहाड़ां वालिये

ऐ सारे जगत दी वाली

ओ कासा कासा कासा

वेड़े तेरे पार करा

तूँ रख दाती ते आसा

ओ मोती मोती मोती

चढ़ लै चढ़ाइयाँ भगता

हथ फड़के सिद्धक वाली सोटी

ओ आवाँ आवाँ आवाँ

मैया तेरे चरणां दी

धूल चूक के मत्थे ते लावां

ओ हलवा हलवा हलवा

अंखियां तों चुक्क पर्दा

जे देखना दाती दा जलवा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।