कुहूके कोयलिया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तोर अंगना म हो मा....कुहूके कोयलिया ll2ll

चढ़ - घोर थे भकती के,रसना ना हो मा......

येहो रसना ना मा.... तोर भुवना मा....

कारी वो कोयलिया बइठे हे आमा डार

काया ले पंछी फेर मानुस कस चिंहार

चढ़ -लागा थे अजब मिठ बोलना हो मा......

येहो बोलना हो मा.... तोर भुवना मा....

कुहूके ज़ब कोयलिया स्वाशा के ले आधार

जाने बिन कइसे भकती के जोड़े तार

चढ़ -धनहे ये गौतम परेवना हो मा.....

ये परेवाना हो मा.... तोर भुवना मा....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।