पाके घूंघरू नचा मैं दर तेरे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

पाके .घुंघरू नचा मैं दर तेरे,

मैया जी मैं फकीर हो गया

कनी मुंदरा खुले ने वाल मेरे,

मईया जी मैं फ़कीर हो गया,

पा के घुंगरू नचा मैं दर तेरे,

रात दी उडीक नहियो दिन दी वी होश ना,

बस तेनु मिलने दा दिल विच जोश माँ,

तेरे चरना च ला ले ने डेरे,

मईया जी मैं फ़कीर हो गया,

पा के घुंघरू नचा मैं दर तेरे,

जिनु वी फकीरी रंग चड़ जाये अमिये,

कोई वी न फेर ओहनू रंग भाये अमिये,

दूर चिंता दे होये ने हनेरे,

मईया जी मैं फ़कीर हो गया,

रमता जोगी पागल फकर कहंदा कोई दीवाना ऐ,

हालत मेरी देख के मेनू कहंदा कोई मस्ताना ऐ,

दिन रात लावा भवना दे फेरे,

मईया जी मैं फ़कीर हो गया,

पा के घुंघरू नचा मैं दर तेरे,

किसे दी नही लोड मेनू किसे दी ना चाह ऐ,

दर्शी निमानेया ने मली तेरी राह ऐ,

नजर आवे तू माँ चार चुफेरे,

मियाँ जी मैं फ़कीर हो गया,

पा के घुंगरू नचा मैं दर तेरेपा के घुंघरू नचा मैं दर तेरे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।