सोणे सोणे मंदरा च रहन वाली मां

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सोणे सोणे मंदरा च रहन वाली मां

कचया घरा नू माए पुल ना जावी

बगे बगे शेर उते बैन बाली मां

कुली ए गरीबा बाली पुल ना जाबी

बड़ियां उमीदा तेरे आउन दिया रखिया

तेरे दर आऊन वाली हवावा माए तकिया

सबना दे घर फेरा पान वाली मां

मेरे घर फेरा पाना पुल ना जावी

सोणे सोणे मंदरा च रहन वाली मां

कचया घरा नू माए पुल ना जावी

बगे बगे शेर उते बैन बाली मां

कुली ए गरीबा बाली पुल ना जाबी

नीके ज‌ए घर बिच मंदिर बनाया मां

रीझा नाल मइया तेरा आसन सजाया मां

उचियां सिंघसना ते बै़न वाली मां

आसन गरीबा वाला पुल ना जावी

सोणे सोणे मंदरा च रहन वाली मां

कचया घरा नू माए पुल ना जावी

बगे बगे शेर उते बैन बाली मां

कुली ए गरीबा बाली पुल ना जाबी

बचया नु मान तेरा मान कदे तोड़ी ना

अपने लाला कोलो मुख कदे मोड़ी ना

रोंदे होये चेहरे नु हसान वाली मां

हंसना हंसाना मैनू पुल न जावी

सोणे सोणे मंदरा च रहन वाली मां

कचया घरा नू माए पुल ना जावी

हर बार मैं ही आऊँदी तू बी कदे आबीं मां

घर मेरे आके सीने ठंड पावीं मां

पगता नु गल नाल लान वाली मां

मैनु वी तु गल लाना पुल ना जावी

सोणे सोणे मंदरा च रहन वाली मां

कचया घरा नू माए पुल ना जावी

बगे बगे शेर उते बैन बाली मां

कुली ए गरीबा बाली पुल ना जाबी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।