न मैं धाम धरती न धन चाहता हु

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॥ पावन पाठ ॥

न धाम धरती न धन चाहता हु ,

किरपा का तेरी एक कण चाहता हु,

जपे नाम तेरा सदा एसा दिल हो,

सुने कीर्ति तेरी वोह शरवन चाहता हु,

विमल घ्यान धरा से मक्सित उबरे,

वोह श्रधा से भरपुर मन चाहता हु,

न धाम धरती न धन चाहता हु .......

नही चाहना है स्वर्ग सुख की,

मैं केवल तुमे प्राण धन चाहता हु,

उजाला हिरदय में अलोकिक हो तेरा,

परम जोती परतेक शण चाहता हु,

न धाम धरती न धन चाहता हु

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।