उठ परदेशी तेरा वक़्त हो गया

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॥ पावन पाठ ॥

अभी तो जगाया था तू अभी सो गया,

उठ परदेशी तेरा वक़्त हो गया,

हम परदेशियो की यही है निशानी,

आये और चले गये ख़त्म कहानी,

कोई आया हस्ते हस्ते कोई रो गया,

उठ परदेशी तेरा वक़्त हो गया.....

बार बार पहले भी तू आया है यहाँ पर,

देखा आखे खोल तेरा ध्यान है कहा पर,

अनमोल जीवन तेरा व्यर्थ हो गया,

उठ परदेशी तेरा वक़्त हो गया.....

सारे रिश्ते नाते तेरे यही रह जाये गे,

हीरे मोती तेरे काम नही आये गे.

भोज पापो वाला बार बार ढोह गया,

उठ परदेशी तेरा वक़्त हो गया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।