ऊँचे ऊँचे पर्वत पे मईया का बसेरा है- नया संस्करण

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ऊँचे ऊँचे पर्वत पे मईया का बसेरा है

( जय जय माँ*, जय माँ, जय माँ, जय माँ ll )

ऊँचे ऊँचे पर्वत पे, मईया का बसेरा है l

मतलब की दुनियाँ में, सच्चा प्रेम तेरा है ll

अपनी सारी जिंदगी, हमने तेरे नाम कर दी l

खुशियाँ या ग़म देना, अम्बे माँ तेरी मर्जी ll

तूँ जो चाहे शाम, चाहे तो सवेरा है l

मतलब की दुनियाँ में, सच्चा प्रेम तेरा है l

ऊँचे ऊँचे पर्वत पे, मईया का बसेरा है,,,

सूरत नैनो में बसा, अखियाँ मैं बंद कर लूँ l

देवी मईया तुझसे, बाते मैं चंद कर लूँ ll

देखूं तुझे जी भरके, यही ख्वाब मेरा है l

मतलब की दुनियाँ में सच्चा प्रेम तेरा है l

ऊँचे ऊँचे पर्वत पे, मईया का बसेरा है,,,

रोते रोते जो चाहें, मुस्काने ले जाते है l

खोया जो जीवन में, सुख सारे पाते है ll

कटे तेरी, कृपा से माँ, दुखों का ये घेरा है l

मतलब की दुनियाँ में सच्चा प्रेम तेरा है l

ऊँचे ऊँचे पर्वत पे, मईया का बसेरा है,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।