ऊंचे पर्वत पे बैठी वैष्णो रानी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

उचे पर्वत पे बेठी वैष्णो रानी सबकी झोली भरे माता रानी,

तुम हो शारदा लक्ष्मी तुम भवानी तेरे दर की है दुनिया दीवानी,

तुमने ही संसार को बनाया,

ये जगत मैया तेरी ही माया ॥

तुम जल थल अम्बर में हो तुम्ही रक्षा करो अम्बे रानी,

उचे पर्वत पे बेठी वैष्णो.......

जब भी देवो पे विपदा है आई,

माँ तुमने ही करी है सहाई ॥

तूने दुर्गा रूप को दर के दुष्टों को मिटाया महारानी,

उचे पर्वत पे बेठी वैष्णो.....

जो भी भक्त तेरे दर पे आते,

मन चाहे मुरादे वो पाते ॥

मैं भी तो हु शरण में तेरी अर्जी सुनलो अब महारानी,

उचे पर्वत पे बेठी वैष्णो....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।