मेरे गुरुवर प्यारे , मेरे गिरिधर प्यारे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरे गुरुवर प्यारे , मेरे गिरिधर प्यारे ।

जोइ गुरुवर प्यारे, सोइ गिरिधर प्यारे।

भज गुरुवर प्यारे, भज गिरिधर प्यारे।

जहँ गुरुवर प्यारे, तहँ गिरिधर प्यारे।

उर गुरु धर प्यारे, उर हरि धर प्यारे।

जय हो गिरिधर प्यारे, जय हो गिरिधर प्यारे।

गुरु भज हरि प्यारे, हरि भज गुरु प्यारे।

गुरु कह हरि प्यारे, हरि कह गुरु प्यारे ।

कह ‘ कृपालु' प्यारे, दोउ कृपालु प्यारे॥

पुस्तक - ब्रज रस माधुरी-3

पृष्ठ संख्या-1

कीर्तन संख्या-1

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।