जे ना होई सुनवाई दर तेरे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जे ना होई सुनवाई दर तेरे, गरीब दस किथे जान गे।

दूर किते ना जे दुखां दे हनेरे, गरीब दस किथे जान गे॥

जिन्ना पल्ले पैसा तैनू चुन्नियां चढ़ाउंदे ने,

हार लै के हंजुआं दे, मेरे जेहे वी आउंदे ने।

जे तू ओहना वल्लों अख्खिया माँ फेरे,

गरीब दस किथे जान गे॥

जे न होई सुनवाई...

दूर किते न जे दुःखा..

साडा की कसूर तुहीयो लिखिआं लकीरां ने,

किसी नू पोशाकां देवे किसे तन लीरां ने।

जिन्ना वेखे ना माँ सुखां दे सवेरे,

गरीब दस किथे जान गे॥

कईयां नू महल दित्ते, किसे सर छत्त ना,

तेरीआं माँ तू ही जाने, साडे कोल मत्त ना।

सारे खेड ने रचाए माँ एह तेरे,

गरीब दस किथे जान गे॥

किते पकवान किते रोटी दे वी लाले ने,

किते रातां कालीआं ने किते माँ उजाले ने।

‘दास’ वरगे वी बच्चे ने बथेरे,

मेरे वरगे वी मईया ने बथेरे

गरीब दस किथे जान गे॥

जे न होई सुनवाई दर तेरे, गरीब दस किथे जानगे

दूर किते ना दुःखा दे हनेरे, गरीव दस किथे जान गे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।