मेरी राधे मेरी राधे मेरी बिगरी बना दे राधे

सुश्री अखिलेश्वरी देवी
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरी राधे मेरी राधे मेरी बिगरी बना दे राधे।

मेरी राधे मेरी राधे मेरी अब तो सुधि लो राधे।

मेरी राधे मेरी राधे मेरी प्रेम अगाधे राधे।

मेरी राधे मेरी राधे मोहिं निज सेवा दे राधे।

मेरी राधे मेरी राधे मेरी रूप अगाधे राधे।

मेरी राधे मेरी राधे मेरी बनि जा ‘कृपालु’ तू राधे।

पुस्तक : ब्रज रस माधुरी, भाग-3

पद संख्या : 90

पृष्ठ संख्या : 147

सर्वाधिकार सुरक्षित © जगद्गुरु कृपालु परिषत्

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।