कौन मेरी नैया पार उतारे

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन विष्णु भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

बिन तुम्हारे कौन उबारे

कौन नैया मेरी पार उतारे

कौन खेवे पतवार

मेरी नैया पड़ी मझधार

भटक गई नाव

खो गया है किनारा

कैसे संभलूं कोई ना सहारा

तुम जो आए ना तारणहार

कौन खेवे पतवार

मेरी नैया पड़ी मझधार

बिन तुम्हारे कौन उबारे...

बंधन में अपने जकड़ लिया है

मोह माया ने पकड़ लिया है

स्वयं का बुना जाल है

जीवन हुआ बेहाल है

कौन काटे बंधन इसके

सिवा तुम्हारे भरतार

कौन खेवे पतवार

मेरी नैया पड़ी मझधार

बिन तुम्हारे कौन उबारे...

अधम जान मुझे ना ठुकराओ

ठाकुर मेरे मुझे हृदय लगाओ

सुध बुध मेरी अब है लौटी

जिन्दगी रह गई बहुत ही छोटी

होगा क्या पछताने से राजीव

सब गंवाया तूने बेकार

कौन खेवे पतवार

मेरी नैया पड़ी मझधार

बिन तुम्हारे कौन उबारे...

अब भी है वक्त सम्भल जा

प्रभु की राह में निकल जा

बड़े दयालु हैं बड़े कृपालु

तुझे भी कर देंगें निहाल

जा शरण में उनकी चला जा

भाव भक्ति का मन में धार

कौन खेवे पतवार

मेरी नैया पड़ी मझधार

बिन तुम्हारे कौन उबारे...

©राजीव त्यागी

Najafgarh new delhi

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।