मेेरे कृष्णा मेरे श्याम रे आजा कब से पुकारू तेरा नाम रे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज :- आजा तुझको पुकारे मेरे गीत रे मेरे मीत रे

मेरे कृष्णा मेरे श्याम रे

आजा कब से पुकारू तेरा नाम रे

मथुरा में ढूंढा मेने गोकुल में ढूंढा

उज्जैन जाके तुझे गुरूकुल में ढूंढा

खोजत तुझको वर्षो गुजर गई

फिर भी रहा ना काम रे

आजा कब से पुकारे तेरा नाम रे

मेरे श्याम रे

सांवली सूरत को तरसे है अंखिया

काटे कटे ना मेरी वैरन ये रतिया

कोई तो जाए जो तुमको सुनाए

मेरा ये पैगाम रे

आजा कब से पुकारू तेरा नाम रे

मेरे श्याम रे

सूना है आंगन है सुना जमाना

हर दर फिरे है तेरा पागल दीवाना

टूट गया हूँ मैं हार गया हूँ

कोशिश करके तमाम रे

आजा कब से पुकारू तेरा नाम रे

मेरे श्याम रे

गमगीन आलम है उजडे चमन में

दर्शन कि चाहत लगी मेरे मन में

छाई उदासी रूपगिरी के

दिल में आठो याम रे

आजा कब से पुकारू तेरा नाम रे

मेरे श्याम रे

लेखक एवं गायक -रूपगिरी वेदाचार्य जी

7792077568

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।